गया। होली का नाम आते ही जेहन में ढेर सारी मस्ती व जमकर पानी की बौछार का नजारा घूमने लगता है। होली पर लोग जमकर पानी का प्रयोग करते है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह सही नहीं है। लगातार गिर रहे भू-जल स्तर से सभी को सबक लेकर पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए आगे आना होगा। इसके लिए होली पर पानी के बजाय लोगों को सूखी होली से को तव्वजो देनी चाहिए। जिससे विस्फोटक स्थिति में पहुंच रहे भूजल के स्तर में सुधार किया जा सके। उक्त बातें मीडिया से बातचीत के दौरान नीमा पंचायत के समाजसेवी तरकेशवर यादव
साथ ही उन्होंने बताया कि यह भी कहा कि सभी को पता होता है कि होली पर मिलने वाले रंगों में केमिकल होता है, लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं होना चाहिए कि होली ही न खेली जाए। यह उन्होंने कहा कि होली आपसी भाइचारे व उल्लास का पर्व है। इस पर्व पर अक्सर लोग जमकर पानी के साथ होली खेलते है। लेकिन वर्तमान में पानी की बढ़ती किल्लत एक समस्या बन गई है। जिसे देखते हुए सभी को जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा। तभी जीवन का बचाव संभव है।पर्व पर भारी मात्रा में पेयजल बर्बाद हो जाता है। पानी बचाने के लिए सार्थक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। लोगों को होली मनाने के लिए गुलाल का प्रयोग करना चाहिए। जिससे वे अपना पर्व हर्षोल्लास से मना सके और पानी की बर्बादी भी रोकी जा सके।होली के पर्व पर एक-एक बूंद बचाकर करोड़ों लीटर पानी बचाया जा सकता है। वह पानी किसी के पीने के काम आएगा। बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित करें। इस पर्व पर कीचड़ डालना भी किसी स्तर पर उचित नहीं है। इससे किसी की आखों की खराब हो सकती है तो त्वचा रोगियों को नुकसान भी हो सकता है
होली के पर्व को गुलाब का तिलक लगाकर या पुष्प भेंट करके मनाएं।
डोभी प्रखण्ड के नीमा पंचायत के जनता के होली की हार्दिक शुभकामनाएं : समाजसेवी तरकेशवर यादव


