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जिला के आदिबासि कुड़मि समाज कुकड़ु प्रखंड कमेटी के अध्यक्ष माइनगर डॉक्टर विभीषण महतो बंशरिआर के अध्यक्षता में जानुम गांव में गोहमा परब पर चर्चा परिचर्चा किया गया। / / LIVE NEWS 24

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संवाददाता : सम्भू सेन (सरायकेला)

सरायकेला : जिला के आदिबासि कुड़मि समाज कुकड़ु प्रखंड कमेटी के अध्यक्ष माइनगर डॉक्टर विभीषण महतो बंशरिआर के अध्यक्षता में जानुम गांव में गोहमा परब पर चर्चा परिचर्चा किया गया। इस बैठक में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित आदिबासि कुड़मि समाज जिला सरायकेला खरसावां संयोजक मंडली सदस्य माइनगर पंचानन महतो केटिआर ने कहा कृषिमूलक आदिबासि कुड़मि जनजाति समुदाय के समस्त बारह महीने के तेरह परब पूर्णरूपेण कृषि मुख्यतः धान-खेती-चक्र एवं प्रकृति पर ही आधारित होती है. उसी कड़ी में सराबन अमास (सावन अमावस्या) के दिन 'चितउ परब' के बाद सराबन पुनइ (सावन पूर्णिमा) के दिन "गोमहा परब" मनाया जाता है. यह परब धूप-बारिश में कड़ी मेहनत के उपरांत खेतों में निकान-काढ़ान-गाछियान आदि कार्य समाप्त होने व कृषि का पहला चक्र सम्पन्न होने की खुशी में थकान मिटाने, सुस्ताने और परिवार व समाज संग मिल बैठ कर आनंद करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन कृषि कार्य निषिद्ध होता है. बसमता माञ (धरती माता) एवं कृषि में उपयुक्त औजारों एवं सहायक पशुधनों को भी विश्राम दिया जाता है व उनकी विशेष सेवा सत्कार किया जाता है. सुबह नहा-धोकर परिवार का मुख्य व्यक्ति भितर-घार में बुड़हा-बुड़हि एवं भुत-पिंड़हा के समक्ष आदि पुरखों व बसमता माञ की अराधना करते हैं. तत्पश्चात नहला-धुला कर साफ किये गये पशुधन गाय-बैल-भैंस के सींग में तेल-सिंदुर मखाते हैं. वहीं घर की मालकिन अरवा चावल, दूब घास आदि से उनका चुमान-बंदन करती हैं. 

इसके बाद पारंपरिक रूप से साल (सखुआ) के पत्ते में 5-7 लहसुन की कली, एक भेला (भेलुआ) बीच में काटकर एवं एक-डेढ़ चम्मच नमक मिलाकर पोटली बनाकर पशुधन को खिलाया जाता है. प्रायोगिक मान्यता है कि इस पारंपरिक दवाई से पशुधन के पेट में जो हानिकारक कीट-कृमि उत्पन्न हुए होते हैं, उनका नाश हो जाता है एवं पेट दर्द, पेट का फाँफना, हरे नये घास से दस्ती जैसी समस्या नहीं रहती। इस दिन स्वादिष्ट पिठा-पकवान, खासकर मांस भात और मांस पिठा का सेवन कर परिवार संग आनंदपूर्वक खुशियां मनाई जाती है। अगली कड़ी में शुक्ल पक्ष भादर एकादशी में नवसृजन का प्रतीक 'करम परब' के दौरान आदि काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार बहनें रक्षा सूत्र के रूप में जाउआ बाँधते है। बैठक का संचालन कुकड़ु प्रखंड कोषाध्यक्ष माइनगर शशिभुसन महतो सांखुआर ने और धन्यवाद ज्ञापन करम चाँद महतो हाॅस्तुआर ने किया। 
बैठक में बिभीषण महतो हाॅस्तुआर, अनिल महतो हाॅस्तुआर, कुड़मालि छात्र समीर महतो पुनरिआर एवं आदि उपस्थित थे।