न्यूज़ डेस्क : भागलपुुुर के मायागंज अस्पताल में भर्ती दर्जनों मरीजों को तीन रुपये के चक्कर में हर रोज शुगर की अधूरी रिपोर्ट मिल रही है। दरअसल, शुगर के मरीजों का जिस वायल में सैंपल लिया जाता है, उसे एक घंटे बाद जांचने पर मरीज का जितना ब्लड शुगर होता है उससे कहीं कम की रिपोर्ट जारी हो जाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो अगर प्रति वायल तीन रुपये खर्च कर दिए जाए तो अस्पताल में भर्ती मरीजों को शुगर की सही रिपोर्ट मिलने लगेगी। मायागंज अस्पताल के क्लीनिकल पैथोलॉजी में अस्पताल में भर्ती मरीजों के शुगर का सैंपल क्लॉट वायल में लिया जाता है, जबकि निजी जांच घरों में सैंपल फ्लोराइड वॉयल में लिया जाता है।
जेएलएनएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र कुमार कहते हैं कि क्लॉट वायल में लिये गये ब्लड सैंपल की जांच एक घंटे के अंदर होती है तो सही शुगर रिपोर्ट मिलती है, लेकिन एक घंटे बाद इस वायल के सैंपल की जांच करने पर समय बढ़ने के साथ-साथ सैंपल में मौजूद शुगर की मात्रा घटने लगती है। ऐसे में जितनी देरी से जांच की जायेगी, शुगर लेवल उतना ही कम मिलेगा। वहीं फ्लोराइड वायल में लिए गए सैंपल की जांच कितनी भी देरी से होगी, उसकी सही रिपोर्ट आयेगी।
चार घंटे बाद होती है क्लॉट वायल से लिये सैंपल की जांच
मायागंज अस्पताल के क्लीनिकल पैथोलॉजी में इंडोर के मरीजों की शुगर जांच के लिए लिये जाने वाला सैंपल क्लॉट वायल में रखा जाता है। इंडोर में भर्ती हर रोज औसतन 60 से 70 मरीजों मरीजों का सैंपल सुबह नौ से लेकर दोपहर बाद एक बजे तक लिया जाता है। इसके बाद इन सैंपलों को लैब में जांचा जाता है। यानी लिये गये सैंपल में से कम-से-कम 75 प्रतिशत सैंपल की जांच एक घंटे बाद ही होती है। इससे इस जांच में मरीज के शुगर की सही लेवल रिपोर्ट में नहीं आ पाती है।
वहीं क्लीनिकल पैथोलॉजी में अन्य खून की जांच, जैसे सीबीसी जांच के लिए लिये जाने वाला सैंपल ईडीटीए (एथिलिनडायमाइन ट्रेटाएसिटिक एसिड) वायल में लिया जाता है। जबकि निजी जांच घर में ईडीटीए व फ्लोराइड वायल का इस्तेमाल किया जाता है। हां, मायागंज अस्पताल के ओपीडी में निजी एजेंसी द्वारा लिये गये सैंपल को फ्लोराइड वायल में रखा जाता है। इसलिए यहां की शुगर जांच रिपोर्ट क्लीनिकल पैथोलॉजी की तुलना में ज्यादा सटीक होती है।
केस नंबर 1 : नवगछिया निवासी मिथिलेश कुमार को मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया। 27 जून को अस्पताल में लिए गए सैंपल की जांच की गयी तो उनका शुगर लेवल 213 एमजी प्रति डीएल पाया गया। जब तिलकामांझी स्थित एक निजी लैब में उसी दिन सैंपल देकर उनकी जांच करायी गयी तो उनका शुगर लेवल 283 एमजी प्रति डीएल निकला।
केस नंबर 2: भीखनपुर निवासी 25 साल की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए स्त्री व प्रसव रोग विभाग में भर्ती कराया गया। 23 जून को क्लीनिकल पैथोलॉजी में उसकी शुगर जांच हुई तो लेवल 146 एमजी प्रति डीएल मिला। जबकि उसी दिन भर्ती होने से पहले एमजी रोड स्थित एक निजी पैथोलॉजी में जांच की गयी तो उसका शुगर लेवल 173 एमजी प्रति डीएल पाया गया था।
मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने कहा, 'ये गंभीर मुद्दा है। इस बात की जानकारी मुझे नहीं थी। जल्द ही क्लीनिकल पैथोलॉजी में शुगर के मरीजों का ब्लड सैंपल क्लॉट के बजाय फ्लोराइड वायल में लिया जाएगा। विभाग के अध्यक्ष से वार्ता होगी और पर्याप्त संख्या में फ्लोराइड वायल की खरीद करायी जाएगी।'


