न्यूज़ डेस्क : सजा से बचने के लिए अपने को मृत घोषित कर जेल से बाहर रहनेवाले सजायाफ्ता दिलीप कुमार मुखोपाध्याय की मृत्यु हो गई। अपने आपको मृत बता कर सजा से बचनेवाले मुखोपाध्याय लंबे समय तक सीबीआई को चकमा दे रहे थे। 24 जून को सीबीआई की टीम ने उन्हें पश्चिम बंगाल के वर्णपुर से पकड़ कर धनबाद सिविल कोर्ट में पेश किया था। उसी समय से वे जेल में थे।
दिलीप कुमार मुखोपाध्याय बीसीसीएल की साउथ गोविंदपुर कोलियरी में कार्यरत थे। उन्हें एक मामले में पांच साल की सजा हुई थी। झारखंड हाईकोर्ट में अपील बेल पर वे बाहर थे। उनके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि दिलीप की मृत्यु हो चुकी है। मुखोपाध्याय वृद्ध और अस्वस्थ थे। सीबीआई धनबाद की टीम उन्हें पश्चिम बंगाल के वर्णपुर से पकड़ कर धनबाद लायी थी। वे परिवार के सदस्यों और चिकित्सक के साथ धनबाद कोर्ट आए थे।
सीबीआई ने वर्ष 1986 में दिलीप सहित तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रच कर धोखाधड़ी करने तथा विस्फोटक अधिनियम एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। धनबाद सीबीआई की विशेष अदालत ने 30 जनवरी 2013 को मामले में तीनों आरोपियों को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी। आरोपियों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। उच्च न्यायालय से आरोपी को अपील बेल पर मुक्त किया गया था। हाईकोर्ट से अपील बेल मिलने के बाद मुखोपाध्याय हाईकोर्ट के समक्ष कभी हाजिर नहीं हुए। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिलीप की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनकी मृत्यु हो गई है।
कोर्ट में मांगा डेथ सर्टिफिकेट तो हुआ था खुलासा
हाईकोर्ट ने इस संबंध में धनबाद सीबीआई की विशेष अदालत को दिलीप कुमार मुखोपाध्याय का मृत्यु संबंधी रिपोर्ट की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर धनबाद सीबीआई ने दिलीप उनकी मृत्यु के संबंध में जांच पड़ताल शुरू की तो पाया कि वह जिंदा हैं तथा धनबाद छोड़कर अपनी पुत्री के साथ पश्चिम बंगाल के वर्णपुर में रह रहे हैं। सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2020 को दिलीप कुमार मुखोपाध्याय का बंधपत्र खारिज करते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। दिलीप कुमार मुखोपाध्याय गंभीर रूप से बीमार थे तथा वृद्धावस्था होने के कारण वे चल-फिर नहीं सकते थे। सीबीआई की टीम उनके परिवार के सदस्यों एवं चिकित्सकों की टीम के साथ उन्हें एंबुलेंस पर धनबाद लायी थी।


