न्यूज़ डेस्क : करगिल युद्ध लड़ चुके भारतीय सेना के रिटायर हवलदार दिनेश सिंह की बाइक चोरी होने के आठ महीने बाद बरामद हुई। हालांकि बाइक को थाने से छुड़ाने में दिनेश के पसीने छूट गये। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चंदौली के रहने वाले दिनेश दो दिनों तक बाइक छुड़ाने के लिये पटना में रुके रहे। लेकिन बाइक छुड़ाने की प्रक्रिया को देखकर वे वापस अपने घर चले गये। दिनेश ने बताया कि उन्होंने वकीलों से बात की तो उन्होंने कहा कि बाइक छुड़ाने में 12 हजार रुपये लगेंगे। बाइक की जमानत लेनी होगी। जबकि दिनेश का कहना है कि उनकी गाड़ी वर्ष 2008 मॉडल की है। अगर अभी वे उसे बेचते भी हैं तब भी 12 हजार रुपये नहीं मिलेंगे।
रिटायर हवलदार नवंबर वर्ष 2020 में पटना के बहादुरपुर थाना इलाके में आये थे। यहीं से उनकी बाइक चोरी हो गई थी। एक सप्ताह पहले वाहन चेकिंग के क्रम में बाइक को पत्रकारनगर थाने की पुलिस ने लावारिस हालत में कांटी फैक्ट्री रोड से बरामद की थी। बाइक पर रजिस्ट्रेशन नंबर गलत मिला तो पुलिस ने उसके चेचिस और इंजन नंबर को कंपनी में भेजा। पता चला कि गाड़ी चंदौली के दिनेश की है। वहां के कागजात पर उनका मोबाइल नंबर भी था। उस पर संपर्क करने पर मोबाइल बंद मिला।
वाट्सएप और मैसेंजर के जरिए पीड़ित तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने किसी तरह मैसेंजर और वाट्स एप के जरिये दिनेश से संपर्क किया। इस पर उन्होंने बाइक चोरी होने के बाबत बहादुरपुर थाने में केस दर्ज होने की बात बतायी। जब पुलिस ने सत्यापन किया तो पता चला कि बाइक चोरी के बाबत वहां दिनेश सिंह ने पहले ही केस दर्ज करवाया था। इसके बाद रिटायर्ड हवलदार पटना पहुंचे लेकिन उन्हें बाइक नहीं मिल सकी। पीड़ित के मुताबिक पुलिस ने उनकी बाइक बरामद कर सराहनीय कार्य किया है लेकिन उसे थाने से छोड़ने की प्रक्रिया इतनी जटिल होगी, ऐसा उन्होंने नहीं सोचा था।


