
इलाके के कोने-कोने में अपनी जाल बिछा चुकी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट किस्त जमा नहीं करने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की भी धमकी देते हैं। लोन लेने वालें ज्यादातर महिला मजदूर वर्ग की हैं। लॉकडाउन के कारण उनका रोजगार छिन गया है। पति प्रदेश में फंसे हैं, जिसके कारण वे किस्त का पैसा जमा नहीं कर पा रही हैं। महिलाओं का कहना हैं कि यहां पेट चलाना मुश्किल हो गया है। फाइनेंस कंपनी कुछ समय दे। रोजगार मिलते ही किस्त भरना शुरू कर देंगे। सुखली देवी, अनुसुईया, देवी, प्रभावती देवी, मुनिया देवी, रूपतारा देवी आदि ने बताया कि जो कमाने वाले हैं, वे प्रदेश में फंसे हुए हैं। ऐसे में कहां से पैसा भरें।
प्रखंड क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक फाइनेंस कंपनियां
एलएनटी, सेंदुजा, भारत फाइनेंस, उत्क्रस, रोहन आदि फाइनेंस कंपनियां गौनाहा प्रखंड के गांव-गांव में लोगों को रोजगार के लिए पैसे का लेन-देन कर रही हैं। उससे प्रखंड के करीब 60 से 70 फीसदी गरीब महिलाएं जुड़ी हैं, लेकिन लॉकडाउन में रोजी-रोजगार नहीं होने के कारण वे लोग यूं ही परेशान हैं। वहीं साप्ताहिक व महीनों में वसूली करने वाली इन कंपनियों के एजेंट इनकी परेशानी और बढ़ा रहे हैं।
एक किस्त टूटा तो OD की धमकी
फाइनेंस कंपनी के एजेंटों द्वारा खाताधारकों से यह भी कहा जा रहा है कि एक भी किस्त टूटा तो OD लगवा देंगे। एकाउंट में OD लगने के बाद कोई भी फाइनेंस कंपनी खाताधारक को लोन नहीं देगी। इन फाइनेंस कंपनियों के ब्रांच मैनेजरों से इस संबंध में पूछे जाने पर उनके द्वारा बताता गया कि सरकार या RBI द्वारा इस संबध में कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिससे फाइनेंस कंपनियों को अपनी वसूली बंद करनी पड़े।


