कोरोना की इस दूसरे लहर में आपदा-राहत विभाग बिहार सरकार और जिला प्रशासन के पहल पर जिले में के कई केन्द्रों पर निर्धन निराश्रित एवं अन्य नाजूक वर्गों के लिए भोजन खिलाने के लिए सामुदायिक किचन शुरू किया गया है। और विद्यालयों में कार्यरत रसोईयों से खाना बनाने खिलाने का काम लिया जा रहा है। और रसोईया बहनें जान जोखिम में डालकर खाना बनाने का काम में लगी हुई है। रसोईयों का यह शिकायत है कि पिछले साल लॉकडाउन में भी सरकार द्वारा संचालित क्वेरींटीन सेंटरों पर खाना बनाने खिलाने कि काम लिया गया था। लेकिन आज तक सरकार अथवा जिला प्रशासन ने कोई भुगतान नही किया ।
इसकी पड़ताल करने बिहार राज्य रसोईया संघ की जिला सचिव रीता बर्नवाल, कोषाध्यक्ष रामचन्द्र प्रसाद, भाकपा-माले नेता आमस शेरघाटी रामलखन प्रसाद आमस मध्य विद्यालय पहुंचा और खाना बनाने के काम में लगी रसोईयों से बात कर उनकी पीड़ा को जाना। रसोईयों ने बताया कि विगत वर्ष में भी सरकार द्वारा संचालित क्वेरेंटीन केन्द्रों पर खाना बनाई थी लेकिन आज तक कोई नही भुगतान किया गया।
आमस वीडियो से शिकायत करने पर मौखिक कहा गया है कि इस बार सरकार यदी पैसा नही देगी तो हम अपने जेब से देंगे।
रसोईया संघ के नेता द्वौय ने कहा कि बिहार में यह नीतीश सरकार का अमानवीय चेहरा है काम लिया जायेगा परन्तु कोई मेहनताना नही दिया जायेगा। नेताओं ने देखा कि किचेन में लकड़ी से खाना बनाने के कारण महिला रसोईयों के सेहत पर बुरा असर है और परेशान है।ऐसी हालत जिले के अन्य केन्द्रों पर है।संघ की ओर से जिलाधिकारी को प्रेषित मांग पत्र के माध्यम से पिछले बाकाये का भुगतान करने तथा इस बार खाना बनाने में लगी रसोईयों को 1000/₹ प्रति दिन के हिसाब से मेहनताना भुगतान किया जाय नहीं तो संघ आंदोलन को बाध्य होगी।


