न्यूज डेस्क : चतरा जिले के किसानों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले प्रतापपुर प्रखंड के टंडवा में जय प्रकाश डैम की स्थिति आज भी बदहाल बनी हुई है। वर्ष 2016 में भारी बारिश के बाद टूटा यह डैम पिछले 10 वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रहा है। डैम के नहीं बनने से इस वर्ष भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। इसका सीधा असर एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों किसानों और उनकी खेती पर पड़ रहा है। जय प्रकाश डैम के माध्यम से आसपास के कई गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचित होती थी। डैम में पानी भरने के बाद पैन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचता था, जिससे धान समेत अन्य फसलों की खेती आसानी से हो जाती थी। लेकिन डैम टूटने के बाद किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने पर फसल उत्पादन प्रभावित होता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
वर्ष 2014 में हुई थी मरम्मत, दो साल बाद ही टूट गया डैम
वर्ष 2014 में लाखों रुपये की लागत से डैम की मरम्मत कराई गई थी। हालांकि मरम्मत के महज दो वर्ष बाद वर्ष 2016 में हुई भारी बारिश के दौरान डैम का एक हिस्सा टूट गया। इसके बाद से डैम की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे थे, लेकिन इसकी जांच और स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जनप्रतिनिधियों ने दिए आश्वासन, लेकिन नहीं हुआ काम
जय प्रकाश डैम की। मरम्मत को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिए। पूर्व मंत्री सत्यानन्द भोक्ता ने मंत्री रहते हुए डैम स्थल का निरीक्षण किया था और जल्द मरम्मत कराने का भरोसा दिलाया था। इसके अलावा सांसद कालीचरण सिंह और विधायक जनार्दन पासवान भी डैम निर्माण को लेकर किसानों और ग्रामीणों को आश्वस्त कर चुके हैं। बावजूद इसके आज तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका।
किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
डैम की मरम्मत नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है किसानसुरेंद्र सिंह, कामेश्वर यादव, प्रवेश ठाकुर,रामदेव मिस्त्री समेत कई किसानों ने कहा कि डैम टूटने के बाद फसल काफी प्रभावित हुआ है। बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।किसानों ने कहा कि 10 वर्षों में खेतीचौपट हो गया।उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से अविलंब डैम की मरम्मत कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
इन गांवों के हज़ारों एकड़ जमीन होता था सिंचित
जयप्रकाश डैम से टंडवा, शंकरपुर, घुज्जी, कल्याणपुर, डुमरी, दानापुर अनन्तपुर, बंडोहरी समेत एक दर्जन से अधिक गांव का जमीन सिंचित हो रहे थे। डैम टूटने के बाद से खेती पर असर पड़ रहा है। पानी का लेयर भी नीचे चला गया है। ऐसे में खेती-बाड़ी के साथ-साथ पीने का पानी की भी लोगों की समस्या बन गई है।
सूत्र : अमित कुमार सिंह, चतरा


