आखिरकार गढ़वा जिले के रंका में पदस्थापित एसडीपीओ डॉ शकील आबिद शम्स पर गाज गिर गई है। लगातार व्यवहार न्यायालयके अधिवक्ता आशीष कुमारदुबे ने लगातार कर रहे जिले के भ्रष्ट्राचारियों का कर रहे पर्दाफाश। एसडीपीओ डा. शम्श को छः महीने के भीतर सरकार ने हटा दिया है। एसडीपीओ डॉ शम्स पर सरेआम पद और शक्ति का दुरपयोग करते हुये दूसरे प्रदेशों से आने वाले ट्रक ड्राइवरों का शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर पैसे की कथित अवैध उगाही जैसे गंभीर किस्म के आरोप लगे थे। समझा जाता है कि इस मामले में ही उन पर भ्रष्टाचार की गाज गिरी है।
यहां बता दें कि डॉ शम्स रंका में योगदान देने के बाद से ही विवादों में रहे हैं। जिले के तेज तर्रार युवा अधिवक्ता आशीष कुमार दूबे ने ट्वीट कर सरकार के मुखिया सीएम और पुलिस के आला अधिकारियों से डॉ शम्स की शिकायत की थी और उनके विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया था। जिसे पुलिस विभाग ने गंभीरता से लिया था और गढ़वा एसपी से जांच रिपोर्ट तलब किया था।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस विभाग के सीनियर अफसरों ने जांच के दौरान मिले तथ्यों से पुलिस मुख्यालय को अवगत करा दिया था। समझा जाता है कि इसके बाद पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने डॉ शम्स को रंका से हटाने का फैसला लिया है। बुधवार की देर शाम जारी अधिसूचना के मुताबिक उन्हें संचार और तकनीकी सेवायें का डीएसपी के पद पर अधिसूचित कर दिया है।
यहां बता दें कि डॉ शम्स पर जिस किस्म के आरोप लगे थे उससे झारखंड पुलिस खासकर गढ़वा पुलिस जहां के एसपी श्रीकांत एस खोत्रे ईमानदार और साफ सुथरी छवि के है, उनके जिले की पुलिस की छवि के लिए नुकसानदेह प्रतीत हो रहा था। ऐसे में सरकार डॉ शम्स पर कार्रवाई कर झारखंड पुलिस की छवि बरकरार रखने में सफल हुई है।


